Thursday, February 25, 2010

ऐ दोस्त!

ऐ दोस्त हर सफ़र कट जाता..
तू अगर दो घडी रुक जाता....
मिल नहीं पाई साहिल से कश्ती..
क्यों छोड़ गया तू ये बस्ती....
कारवां हमारा चल पड़ा था..
मेरा सब हमारा हो गया था....
फिर बीच में क्या हुआ हमसफ़र..
तू हो गया मुझसे सबसे बेखबर....

बस साथ है उस पहले कदम का..
जो साथ चले थे हम डगर का....
मैंने यादों का एक पुल बना डाला है..
जो मुझको तुझसे मिलाने वाला है.....

Monday, February 22, 2010

अनंत



अनंत रास्तो में..
अनंत ख्वाहिशें हैं..;
अनंत हैं सितारे..
अनंत पल वो सारे..;
अनंत में समाये....
इस..
अनंत को सताएं